— पं. नीरज शर्मा, जयपुर
जयपुर, 24 जून 2026।भगवान भैरव के अनेक स्वरूपों में बटुक भैरव का स्वरूप सबसे सौम्य, करुणामय और शीघ्र प्रसन्न होने वाला माना जाता है। बटुक का अर्थ है बालक, इसलिए इस रूप में भगवान भैरव दिव्य बालक के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
शैव और तांत्रिक परंपराओं में माना जाता है कि जीवन में कम से कम एक बार भैरव उपासना अवश्य करनी चाहिए। इसका उद्देश्य सिद्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के भय, भ्रम, अहंकार और कमजोरियों पर विजय पाना है।
बटुक भैरव को कलयुग का जागृत, संकटमोचन और रक्षक देवता माना जाता है। उनकी उपासना से साहस, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती है तथा नकारात्मकता, भय और बाधाओं का नाश होता है।
बटुक भैरव जयंती 2026 : 24 जून, बुधवार
पूजन मंत्र : ॐ बटुक भैरवाय नमः या ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं॥
इस दिन सफेद पुष्प, फल और विशेष रूप से बेसन के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। साथ ही काले कुत्ते को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
भैरव साधना का सबसे बड़ा संदेश है—
"जिस दिन मनुष्य अपने भीतर के भय को पहचानकर उस पर विजय पा लेता है, उसी दिन उसके भीतर का भैरव जागृत होने लगता है।"
॥ जय श्री बटुक भैरव ॥
॥ ॐ बटुक भैरवाय नमः ॥