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नंदकिशोर डंडोरिया पर निगम प्रशासन करेगा कानूनी कार्रवाई !

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पद न रहते हुए भी नगर निगम कार्यालय और यूनियन के लेटरहेड का अनधिकृत उपयोग का मामला

भारतीय न्याय संहिता के तहत हो सकती है कार्रवाई

जयपुर, 4 मार्च 2025 (न्याय स्तंभ)। जयपुर नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया द्वारा अपने पद की समाप्ति के बावजूद नगर निगम कार्यालय और यूनियन के आधिकारिक लेटरहेड का उपयोग किया जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक नैतिकता का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत एक अपराध भी हो सकता है।

चुनाव अधिसूचना के बाद भी जारी है अनधिकृत उपयोग

नगर निगम चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद, पूर्व अध्यक्ष का पद स्वतः समाप्त हो जाता है, और उन्हें सरकारी कार्यालय या संसाधनों का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं रहता। लेकिन डंडोरिया चुनाव अधिसूचना जारी होने के बावजूद नगर निगम कार्यालय का उपयोग कर रहे हैं और यूनियन के लेटरहेड पर पत्र जारी कर अधिकारियों को चेतावनी दे रहे हैं।
यह कार्य नगर निगम के प्रशासनिक नियमों और सेवा आचरण के विरुद्ध है। चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद पूर्व अधिकारियों को अपने पद से संबंधित सभी गतिविधियां रोक देनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्यालय या संसाधनों का अनधिकृत उपयोग करता है, तो उस पर सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

वहीं ऐसे व्यक्ति जो पद पर न होते हुए भी अपने प्रभाव का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करता है, तो उस पर भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

स्थानीय निकाय अधिनियम और नगर निगम सेवा नियमावली
चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद पूर्व पदाधिकारियों का सरकारी संसाधनों का उपयोग अनधिकृत माना जाता है और दंडनीय हो सकता है। हालांकि यहां मामला नगर निगम सफाई कर्मचारी यूनियन से जुड़ा है। लेकिन अधिसूचना जारी हो गई और उम्मीद्वारों ने नामांकन पत्र भर दिए हैं। वहीं सारी चुनावी कार्रवाई भी पूरी हो गई है। लेकिन अभी चुनावों पर अघोषित रोक लगी हुई है।

संभावित दंड और कार्रवाई:

आर्थिक दंड (जुर्माना) और सरकारी सुविधाओं से प्रतिबंध।

गंभीर अपराध साबित होने पर 3 से 7 साल तक की जेल।

सरकारी कार्यालयों से निष्कासन और भविष्य में कोई आधिकारिक पद न मिलने की संभावना।

प्रशासन को करनी चाहिए कार्रवाई

पूर्व नगर निगम अध्यक्ष द्वारा नगर निगम कार्यालय और यूनियन के लेटरहेड का उपयोग भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत दंडनीय अपराध है। इस मामले में प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सरकारी नियमों और आचार संहिता का पालन सुनिश्चित हो सके।



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