प्रशासन की अनदेखी से धड़ल्ले से जारी अवैध निर्माण
जयपुर। 3 अप्रैल 2025(न्याय स्तंभ)। शहर में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला दिल्ली रोड पर पुरानी चुंगी का है , जहां कुछ लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध तरीके से निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अवैध निर्माण की शिकायत जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से की, लेकिन बावजूद इसके निर्माण कार्य तेजी से जारी है। जबकि इस मामले को लेकर हवामहल से भाजपा विधायक बलमुकुंदाचार्य भी प्रशासन को शिकायत दे चुके हैं।
शिकायत के बाद भी निष्क्रियता
सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में जेडीए अधिकारी राजेश पाठक को सूचित किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत से अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि अधिकारियों को कई बार सूचना देने के बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया, जिससे यह संदेह गहराता है कि भ्रष्टाचार इस पूरे मामले की जड़ में है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे प्रकरण को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की प्रवृत्ति और बढ़ जाएगी। सवाल यह है कि क्या जेडीए अधिकारी और प्रशासन सो रहे हैं, या फिर जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं?
क्या बोले अधिकारी?
इस मामले में जब जेडीए अधिकारी और जोन सीआई राजेश पाठक से 20 दिन पहले संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है , दिखवाता हूं। लेकिन जब उनसे दोबारा अवैध निर्माण के बारे में पूंछा गया तो उन्होंने कहा कि आप शिकायत प्राप्त दे दो हम कार्रवाई कर देंगे। लेकिन आज करीब 25 दिन होने को आए जेडीए की टीम वहां पहुंची ही नहीं। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह केवल बयानबाजी है, क्योंकि अभी तक मौके पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई गई है।
न्याय की मांग
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने उच्च प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषी अधिकारियों और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और इस अवैध निर्माण को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
(न्याय स्तंभ के लिए विशेष रिपोर्ट)