BREAKING NEWS
Search

ट्रस्ट की जमीन पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की तैयारी

39

सवालों के घेरे में पुराना सौदा

न्याय स्तंभ की विशेष रिपोर्ट

जयपुर। 4 अप्रैल 2025 । राजस्थान के जयपुर शहर में एक ट्रस्ट द्वारा लगभग 25 वर्ष पहले बेची गई जमीन पर अब एक बड़ा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनने जा रहा है। निर्माण की तैयारियों के बीच यह सौदा एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। जमीन की बिक्री से लेकर मौजूदा निर्माण तक की प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे हैं।

90 के दशक में ट्रस्ट की संपत्ति के बेचान की जानकारी

प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, यह जमीन मंदिर ठाकुर श्री सीताराम, राजपूत समाज , पुरवियान जी की थी, जिसका बेचान 90 के दशक में शहर के ही एक बड़े व्यवसाई को कर दिए जाने की जानकारी मिली है। उस समय इस सौदे को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी, लेकिन अब जब जमीन पर मल्टीस्टोरी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़ा करने की जानकारी मिली तो कई सामाजिक संगठनों और ट्रस्ट के पुराने सदस्यों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

क्या ली गई थी सभी कानूनी मंजूरियां?

इस सौदे की वैधता को लेकर संशय इसलिए भी गहरा रहा है क्योंकि:

ट्रस्ट की संपत्ति की बिक्री के लिए जरूरी सरकारी अथवा न्यायिक अनुमति ली गई थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।

ट्रस्ट डीड में क्या जमीन बेचने की अनुमति थी, इस पर भी अब पड़ताल शुरू हो चुकी है।

दस्तावेज़ों में मूल्यांकन और बिक्री राशि बाज़ार दरों के अनुरूप थी या नहीं, इस पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

वर्तमान में हो रहा है करोड़ों का निर्माण

वर्तमान में जिस जमीन पर निर्माण कार्य करने की तैयारी है वह अब मुख्य बाज़ार क्षेत्र में आती है। यहां प्रस्तावित कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दुकानों, ऑफिस स्पेस और शोरूम्स के लिए जगह बनाई जा रही है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इसकी अनुमानित लागत 10 से 15 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है।

समाजसेवियों और स्थानीय लोगों ने की जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवी संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि 25 साल पहले हुए इस सौदे की नवीन जांच करवाई जाए। उनका कहना है कि अगर जमीन ट्रस्ट की थी, तो उससे होने वाला लाभ ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों में लगना चाहिए था, न कि निजी व्यावसायिक लाभ में।

इस मामले पर जब विधि विशेषज्ञों की राय ली गई तो उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की संपत्ति निजी संपत्ति नहीं होती, इसलिए बेचना पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी ढंग से होना चाहिए। बेचने के लिए इसके कुछ शर्तों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। जिसमें

ट्रस्ट डीड की जांच – देखना होगा कि डीड में संपत्ति बेचने की अनुमति है या नहीं।

ट्रस्टी की मंजूरी – ट्रस्ट की मीटिंग में प्रस्ताव पास होना जरूरी है।

सरकारी अनुमति – कुछ मामलों में जिला प्रशासन या कोर्ट से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

उचित मूल्य पर बिक्री – पारदर्शिता के साथ, बाज़ार दर पर बेचना जरूरी है (नीलामी या टेंडर से बेहतर होता है)।

राशि का उपयोग – बिक्री से प्राप्त धन ट्रस्ट के उद्देश्य के लिए ही उपयोग किया जा सकता है।

न्याय स्तंभ इस मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की जांच, प्रशासनिक कार्यवाही और स्थानीय प्रतिक्रिया से जुड़े हर पहलू को आपके सामने लाता रहेगा।

ट्रस्ट ने ये संपत्ति करीब 25 साल पहले ही बेच दी थी। इस जमीन पर कुछ लोगों ने जबरन कब्जा कर रखा था। ट्रस्ट के पास उस समय इतना धन और समय नहीं था कि वो कानूनी प्रक्रिया से जमीन का मालिकाना हक ले सके। इसलिए इसका बेचान हमने जो भाव मिले उसमें कर दिया था।

मालचंद , वर्तमान ट्रस्ट अध्यक्ष,



न्याय की अवधारणा को सशक्त बनाने हेतु समाचार पत्र न्याय स्तम्भ के माध्यम से एक अभियान चलाया जा रहा है। आइए अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए आप भी हमारा साथ दीजिये। संपर्क करें-8384900113


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *