सीएलसी......खबर का दिखा असर

सीएलसी......खबर का दिखा असर

सीएलसी की कार्यप्रणाली की जांच शुरू
जयपुर। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के उद्देश्यों के लाभ दिलाने के लिए जयपुर में जिस संस्था को जिम्मा सौंपा गया वो ही बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ करने लगी। अपने प्रमुख उद्देश्य शहरी महिलाओं के लिए बनाए जाने वाले स्वयं सहायता समूह ओर उनके उत्पादों को बाजार में बेच कर उनको प्रोत्साहित करने के मामले में भी कुछ अलग नहीं कर पाई। वहीं नगर निगम और स्वायत्त शासन विभाग सिर्फ ये सब अपनी आंखें बंद कर पिछले 5 साल से ये सब कारगुजारियां देख रहा है। न्याय स्तंभ में खबर प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने सीएलसी की जांच शुरू हो गई है।
सबसे पहले तो डीएलबी के अधिकारियों ने ऐसी संस्था को कार्यादेश जारी किया जो की इस कार्य के लिए योग्य नहीं थी और तो  और उसको ही पूरे कार्य का जिम्मा बिना किसी योग्यता के सौप दिया। यहीं सब कुछ नहीं रूका और संस्था को बिना टेंडर ही कार्य करने के आदेश प्रदान कर दिए। अब इसे अधिकारियों की मंशा कहें या लापरवाही ये तो वही जाने। लेकिन इतना जरूर है कि जो भी हो सब मिलीभगत से चल रहा है। बेफिक्री का आलम तो इस तरह है कि कई बार शिकायतें आने के बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे । उनको किसी भी प्रकार का भय नहीं है कि अगर जांच में कोई अनियमितता पाई जाती है तो क्या अंजाम होगा।लेकिन जब अधिकारी ही इस संस्था में पदाधिकारी है तो क्या डरना ।

जब मामला उठा तो आनन-फानन में प्रदेश की सभी सीएलसी की वर्चुअल बैठक बुलाई गई लेकिन वो भी किसी अंजाम पर नहीं पहुंच पाई। इस बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा होनी थी लेकिन शायद सिर्फ बातों तक ही सीमित रह गई।
खेर जो भी हो मामले की जांच तो प्रारम्भ हुई और जल्द ही अपने अंजाम तक भी पहुंचेगी।

मेरे सामने ये मामला आया है। इसको दिखवाता हूं। मैंने अभी नया जॉइन किया है।फिर मेडिकल लिव पर चले गया था।
वीडी सकरवालए संयुक्त निदेशकए स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर