कोरोना वार/आयुर्वेद अपनाएं कोरोना भगाएं

कोरोना वार/आयुर्वेद अपनाएं कोरोना भगाएं

जयपुर। न्याय स्तंभ.पूरा विश्व कोरोना महामारी के कारण संकट का सामना कर रहा है। दुनिया के टॅाप देश अभी तक इसका इलाज ढूंढ़ने में असहाय नजर आ रहे हैं। भारत में भी इसकी वेक्सीन को लेकर रिसर्च चल रही है लेकिन अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाएं है। लेकिन भारत में प्रकृति से नजदीकियां बढ़ा कर और आयुर्वेद का सहारा लेकर कोरोना महामारी को रोकने का प्रयास चल रहा है  और आयुर्वेद विभाग द्वारा बनाए गए काढे और मेडिसीन के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं ये कहना है राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय सिरसी में कार्यरत डॉ.नंदकिशोर दाधीच का।

डॉ.नंदकिशोर दाधीच ने बताया कि आयुर्वेद विभाग कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना पर विजय पाने का प्रयास कर रहा है। अभी आयुर्वेद विभाग को चिकित्सा विभाग के अधीन ले लिया गया है जिससे फ्रंटलाइन में आयुर्वेद स्टाफ भी कार्य कर रहा है। जिसमें कोई ट्रेनिंग तो कोई क्वारेन्टाइन सेंटर में अपनी सेवाएं दे रहा है। उनका कहना है कि जितना आयुर्वेद के नजदीक हम जाएंगे उतना ही हम अपने आप को सुरक्षित कर सकते हैं।

शोध के मिले सकारात्मक परिणाम
डॉ. नंदकिशोर बताते हैं कि आयुष नीति के अनुसार अभी क्वारेन्टाइन पर रिसर्च चल रही है। जिसमें क्वारेंटाइन सेंटर पर रह रहे लोगों को 14 दिन तक काढे और आयुर्वेदिक दवाइयां दी जाती है। उन्होंने बताया कि गुजरात में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। जिसके तहत वहां 98 क्वारेन्टाइन सेंटर में 5800 क्वारेंटाइन पेंशेंट्स को 14 दिन तक आयुर्वेदिक काढा और दवाइयां दी गई जिनमें से मात्र 11 लोग पॉजीटिव पाए गए। पॉजीटिव रोगियों को भी जब 3 दिन का स्पेशल कोर्स दिया गया तो वे भी नेगेटिव हो गए। इसके अलावा केरल और गोआ जैसे अन्य राज्यों में भी आयुर्वेद को साथ लेकर कोरोना से जंग जारी है। उनका कहना है कि दिल्ली में पुराण आयुर्वेद इलाज से चौधरी ब्रह्म आयुर्वेद अस्पताल चल रहा है वहां से भी उत्साहपूर्वक रिजल्ट सामने आ रहे हैं।


कोरोना वॉरियर्स को दिया जा रहा आयुर्वेदिक बूस्टर
डॉ. नंदकिशोर बताते हैं कि राजस्थान में कोरोना वॉरियर्स जैसे डॉक्टर्स,नर्सिंग स्टाफ ,पुलिस कर्मी,सफाई कर्मचारी,आशा सहयोगिनी और अन्य लोग जो कोरोना को हराने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं उनके लिए इम्यूनिटी बुस्टर कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके तहत उनके लिए 100—100 ग्राम के स्पेशल काढे के पैकेट बनाकर दिए जाएंगे जिसको लेने से उनकी इम्यूनिटी पावर को बढ़ाया जा सके। सरकार की यह भी योजना है कि जहां—जहां भी आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं वहां भी आम लोगों को घर—घर जाकर काढे का वितरण किया जा रहा है जिससे उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ सके।


घर पर ही करें काढे का निर्माण
डॉ. नंदकिशोर बताते हैं कि प्रकृति के जितना नजदीक जाएंगे उतना ही हम सुरक्षित रहेंगे। उनका कहना है कि आयुष द्वारा बताई गई गाइडलाइन का पालन करें और साफ—सफाई का ध्यान रखें। घर पर ही काढे का निर्माण कर स्वयं और अपने परिवारजनों को स्वस्थ रखे।डॉ. नंदकिशोर बताते हैं कि प्रकृति के जितना नजदीक जाएंगे उतना ही हम सुरक्षित रहेंगे। उनका कहना है कि आयुष द्वारा बताई गई गाइडलाइन का पालन करें और साफ—सफाई का ध्यान रखें। घर पर ही काढे का निर्माण कर स्वयं और अपने परिवारजनों को स्वस्थ रखे।


उन्होंने बताया कि तुलसी,लौंग,सोंठ,काली मिर्च, हल्दी को ओटा कर उसे छान कर काढे का निर्माण करें। इसको मुनक्का या गुड जिसको पीने से आपकी इम्यूनिटी पावर में बढोत्तरी होगी और रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि सुबह—शाम गर्म पानी का सेवन करें और गोल्डन दूध यानि दूध में हल्दी मिलाकर उसका सेवन करने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

डॉ. नंदकिशोर ने कहा कि मीडिया के माध्यम से वे राजस्थान सरकार से अपील करते हैं कि कोरोना के इलाज के समय आयुर्वेद डॉक्टर्स को भी साथ लिया जाए तो अन्य राज्यों की तरह हम भी कोरोना को जल्द ही हरा पाएंगे। उनका कहना है कि स्वास्थय विभाग द्वारा आयुर्वेद को अपने अधीन ले तो लिया है लेकिन इस कारण से गांवों में मौजूद कई आयुर्वेदिक चिकित्सालय बंद पड़े हैं। जिससे गांवों में लोगों को आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि इस समय ग्रामवासियों को इसकी अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार एक कारगर नीति बनाकर आयुर्वेद के डॉक्टर्स और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्ध्ति का सही प्रकार से प्रयोग करे।