कोपा का 'कोप' यूट्यूब पर

कोपा का 'कोप' यूट्यूब पर

साभार निखिल भारतीय,जयपुर

यह यूट्यूबर्स का ज़माना है। पिछले एक दशक में यूट्यूब के मंच ने मनोरंजन का एक नया पैमाना विकसित किया है। ये यूट्यूबर्स किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं। कारण है यूट्यूब पर वीडियो अपलोड प्रक्रिया का बेहद सरल होना। यही वजह है की बहुत ही कम समय में यूट्यूब ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। यहाँ कोई भी किसी भी क्षेत्र से जुड़ा वीडियो कंटेंट अपलोड कर सकता है और कला, संगीत, शिक्षा व प्रशिक्षण, आईटी, इंजीनियरिंग तथा और लगभग सभी विषयों से सम्बंधित कंटेंट आपको यूट्यूब पर मिल सकता है। वर्तमान में गूगल के स्वामित्व वाले यूट्यूब की स्थापना विश्वभर में ऑनलाइन पेमेंट में अग्रणी स्थान रखने वाली कंपनी पेपाल के तीन पूर्व कर्मचारियों- चाड हर्ले, स्टीवन चान और जावेद करीम द्वारा की गयी थी।
हालाँकि यूट्यूब को समय-समय पर आलोचना का शिकार भी होना पड़ता है लेकिन इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी है और आज ये टीवी शोज़, फिल्मों आदि माध्यमों के विकल्प के रूप में उभरा है। यूट्यूब के दर्शकों में सबसे ज़्यादा और महत्वपूर्ण संख्या बच्चों की है। यूट्यूब पर बच्चों से सम्बंधित कंटेंट की भरमार है, इससे कार्टून चैनल्स के दर्शकों की संख्या में कमी आयी है। यूट्यूब पर ऐसे कई चैनल हैं जिन पर बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वीडियो उपलब्ध हैं। इनमे एनिमेटेड वीडियो प्रमुख हैं जिनमे नर्सरी राइम्स, कहानियां, कवितायें, गीत आदि हैं।
लेकिन इन सबसे अलग कुछ ऐसे शोज़ भी हैं जिनमें बच्चे ही सेलेब्रिटी हैं और वे कई तरह के एक्ट करते हुए दिखाई देते हैं। साथ ही इन शोज़ में अन्य पात्र भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। आपको देखकर लगेगा की शो के ओनर बच्चे हैं और साथ में काम करने वाले इनके घरवाले हैं या माता पिता हैं, लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं। लाखों की तादाद में सब्सक्राइबर्स लिए ये शोज़ कई देशों में लोकप्रिय हैं और स्थानीय भाषा में प्रसारित हो रहे हैं। लाइक, सब्सक्राइब, और कमेंट यूट्यूब शोज़ की प्रमुख खुराक हैं। अब सोचिये, यदि इन शोज़ से ये अधिकार छीन लिए जाएं तो क्या होगा, क्योंकि किसी भी यूट्यूब शो को मिल रहे विज्ञापनों का आधार है लाइक्स।
कुछ समय से देखा जा रहा था कि विश्वस्तर पर इन शोज़ को लेकर कई शिकायतें विभिन्न सूत्रों से आ रहीं थीं। अमेरिका के फ़ेडरल ट्रेड कमीशन ने अपनी जांच में यह पाया कि यूट्यूब बच्चों के लिए अमेरिकी निजता सुरक्षा कानून को ध्यान में रखकर काम नहीं कर रहा था। एफ़टीसी की रिपोर्ट के अनुसार यूट्यूब के उपयोगकर्ताओं ने बच्चों से सम्बंधित चैनल्स के दर्शकों से जानकारी जुटाई और न तो माता पिता को इसकी जानकारी दी और न ही उनकी सहमति प्राप्त की, वैसे भारत में इस तरह का कोई मामला नहीं देखा गया। गत सितम्बर 2019  में  एफ़टीसी ने कोपा (चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट) के तहत कड़ा रुख़ अपनाते हुए यूट्यूब तथा गूगल को अपने नियमों में बदलाव करने का निर्देश दिया। सूत्रों की मानें तो गूगल को इसके लिए 17 करोड़ डॉलर का समझौता करना पड़ा।
इसके अलावा यूट्यूब को बच्चों से संबंधित वीडियो अपलोड करने के लिए अमेरिकी निजता सुरक्षा कानून को ध्यान में रखकर नए नियम तैयार करने के निर्देश दिए गए  हैं। इसमें पर्सनलाइज्ड एड, कमेंट, नोटिफिकेशन, लाइव चैट और अन्य फीचर हटा दिया गया है। नियमों में इस बड़े बदलाव से कंटेंट क्रिएटर की कमाई कम हो जाएगी। डेटा के आधार पर विज्ञापन लगाने के विकल्प खत्म होने के बाद अब उन्हें विज्ञापन मिलने में भी परेशानी आ सकती है। नए नियमों के तहत बच्चों से सम्बंधित वीडियो अपलोड करते समय उसे 'बच्चों के लिए' केटेगरी में मेंशन करना होगा। यह करने से उस वीडियो का कमेंट सेक्शन बंद हो जायेगा। अगर आपका कंटेंट 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए है तो आप इस केटेगरी में आते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपके वीडियो पारंपरिक रूप से वयस्क गतिविधियों जैसे कि रोजगार, वित्त, राजनीति, गृह स्वामित्व, गृह सुधार, या यात्रा के बारे में हैं, तो शायद आप तब तक कवर नहीं होंगे जब तक कि आपकी सामग्री बच्चों की ओर न हो। दूसरी ओर, यदि आपकी सामग्री में बच्चों की पारम्परिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं, तो यह बाल-निर्देशित हो सकता है। उदाहरण के लिए, FTC ने हाल ही में यह निर्धारित किया है कि एक ऑनलाइन ड्रेस-अप गेम बच्चे द्वारा निर्देशित था।
नियम यह निर्धारित करता है कि आपकी सामग्री बच्चे द्वारा निर्देशित है या नहीं, यह निर्धारित करने में FTC अन्य पहलुओं पर विचार करेगा; जैसे कि- विषय सामग्री, दृश्य सामग्री, एनिमेटेड पात्रों का उपयोग, किसी भी प्रकार की ऑडियो सामग्री या संगीत, मॉडल्स की उम्र, बाल कलाकारों या सेलिब्रिटीज की उपस्थिति जो बच्चों से अपील करते हैं, साइट की भाषा या अन्य विशेषताएं, बच्चों से सम्बंधित विज्ञापन या प्रचार सामग्री, तथा दर्शकों की उम्र के बारे में विश्वसनीय साक्ष्य।
अगर यूजर इन नियमों के पालन को लेकर गंभीर नहीं है तो लगभग 42,530  तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सितम्बर 2019 में हुए समझौते में 35,000 डॉलर का जुर्माना कंटेंट क्रिएटर को चुकाना पड़ा था।
अगर इससे हो रही कमाई की बात करें तो अब तक कंटेंट क्रियेटर वास्तव में सरल तरीके अपना रहे थे, वे सस्ते प्रोडक्शन की मदद से वीडियो बनाते और उसे यूट्यूब पर अपलोड कर देते थे। इसके बाद लाखों व्यूज और वाच टाइम के जरिये उनकी कमाई होती थी। अब उन्हें पर्सनलाइज्ड एड की जगह सिर्फ कॉन्टेक्स्ट वाले एड मिलेंगे। विज्ञापन देने वाले वास्तव में पर्सनलाइज्ड एड को अहमियत देते हैं। इसमें डेटा के हिसाब से एड देने की आजादी छिन जाएगी। इस सन्दर्भ में यूट्यूब की ओर से यह भी कहा गया कि दुनिया भर के कई कंटेंट क्रियेटर ने बच्चों के लिए बेहतरीन वीडियो बनाये हैं और इस बदलाव से उन पर भी असर पड़ेगा। नियमों में बदलाव जनवरी 2020 से लागू कर दिए गए हैं।