जयपुर—दो दशक से कॉलोनी में पानी का इंतजार, जलदाय विभाग पानी की लाइन डालकर भूला, अधिकारी नहीं उठाते फोन

जयपुर—दो दशक से कॉलोनी में पानी का इंतजार, जलदाय विभाग पानी की लाइन डालकर भूला, अधिकारी नहीं उठाते फोन
पानी का टैंकर खाली होते हुए

जयपुर। न्याय स्तंभ.1 मई 2020. अभी गर्मियां पूरी तरह से शुरू हुई भी नहीं की भांकरोटा की कॉलोनियों मेें पानी की किल्लत होने लगी है। साधारण दिनों में तो फिर भी पानी कहीं से भी लाया जा सकता है लेकिन इस कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के चलते कॉलोनी के वांशिदे कहां जाएं। वहीं जलदाय विभाग बरसों से बसी हुई कॉलोनी में पाइप लाइन डालकर ही भूल गया। कॉलोनी के वांशिदों ने कनेक्शन भी लिए लेकिन जब बरसों से पानी नहीं आया तो कुछ ने तो कटवा लिये और कुछ आज भी नलों में पानी आने की बांट जोह रहे हैं।

जी हां 2 दशक पहले से भी बसी हुई भांकरोटा की रामरतन कॉलोनी आज भी पानी के लिए तरस रही है। शुरूआत में वहां लोगों ने पानी के कनेक्शन लिए लेकिन जब पानी नहीं आया तो  कई लोगों ने कनेक्शन ही कटवा दिए। अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जो की नलों में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। अब इसे जलदाय विभाग की नाकामी कहें या कॉलोनी के वांशिदों का भाग्य लेकिन जो भी हो सरकार और जलदाय विभाग यहां पर लापरवाह नजर आते हैं। रामरतन कॉलोनी के वांशिदों ने बताया कि कॉलोनी को बसे हुए करीब 20 वर्ष हो गए लेकिन सुविधा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। कैसे ना कैसे करके यहां उन लोगों ने रहने के लिए आशियाने बनाए लेकिन सबसे मूलभूत आवश्यकता पानी के लिए आज भी तरस रहे हैं।

जलदाय विभाग के अधिकारी नहीं उठाते फोन
जब हमने रामरतन कॉलोनी की पानी की समस्या को लेकर अधिकारियों से बात करनी चाही तो तीन दिन से उनका फोन ही नहीं उठ रहा। जब सरकार ने सभी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कोरोना संकट काल में अलर्ट रहने को कहा है तो ये ​जलदाय विभाग का कैसा अलर्ट की या तो मोबाइल डायवर्ट रहता है या फिर नो रेस्पोंस। हमने चित्रकूट जलदाय विभाग कार्यालय के एईएन डी आर वर्मा और जेईएन आयुष गुप्ता को कई बार फोन और मैसेज डाले लेकिन ना तो उन्होंने फोन उठाया और ना ही मैसेज का रिप्लाय दिया। अब यहां यह सवाल उठता है कि आम जनता शिकायत करे तो कहां करे।

टैंकरों के भरोसे कट रहा जीवन
रामरतन कॉलोनी में रहने वाली गृहणी इन्द्रा बताती हैं कि जलदाय विभाग का कनेक्शन होने के बाद भी हमारे यहां पानी नहीं आता है। जब से यहां मकान बनाया है तब से आज तक केवल जलदाय विभाग का कनेक्शन नजर आता है लेकिन पानी का नामोनिशां नहीं है। प्राइवेट टैंकरों से पानी मंगवाकर जीवनयापन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बार जलदाय विभाग के कार्यालय में जाकर शिकायत भी की लेकिन ना तो कोई चैक करने आया और ना ही आज तक पानी की व्यवस्था हुई। ऐसे में करें तो क्या करें वहां से हमेशा ये ही जवाब मिलता है कि आपकी कॉलोनी टेल एंड पर है पानी नहीं आ पाएगा।

शिकायत करने पर कनेक्शन कटवाने की नसीहत
कॉलोनी में ही रहने वाले जितेन्द्र यादव का कहना है कि कई वर्षों से पानी के लिए परेशान हो रहे हैं लेकिन नलों में पानी तो दूर हवा भी नहीं आ पाती है। महीने में करीब 5 टैंकर पानी के मंगवाने पड़ते हैं जिसमें करीब 1500 रूपए खर्च होते हैं। कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों से शिकायत की लेकिन फिर भी कोई असर नहीं पड़ा उल्टा विभाग के कर्मचारियों ने यह बोल दिया की पानी नहीं आता तो कनेक्शन कटवा लो।

टेल एंड बता कर अपने कर्तव्यों की करते इतिश्री
जलदाय विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से जब पानी नहीं आने की शिकायत की तो उनका कहना है कि टेल एंड होने के कारण पानी की सप्लाई में समस्या आती है। उनका कहना है कि इस कॉलोनी से आगे कोई कनेक्शन नहीं है इसलिए पानी नहीं आ पाएगा। कॉलोनी के वांशिदों का कहना है कि जब जलदाय विभाग को यह पता था की यहां टेल एंड है कॉलोनी में पानी की सप्लाई नहीं हो पाएगी तो कनेक्शन देने की क्या आवश्यकता थी। केवल सिक्योरिटी मनी के लिए ही जलदाय विभाग कनेक्शन देता है क्या। उनका कहना है कि सरकार घर—घर पानी पहुंचाने के लिए युद्ध् स्तर पर प्रयास कर रही है लेकिन वहीं दूसरी और जलदाय विभाग कनेक्शन बढ़ाने के बजाय पाइप लाइन डाल कर ही भूल जाता है।